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    सलमान खान वाली ‘बीमारी दर्द देने वाली:ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया डिजीज से चेहरे पर बिजली के झटके जैसा एहसास... एसएमएस में हर माह 10 केस

    6 months ago

    सलमान खान को हुई ‘ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया’ असहनीय और दर्द देने वाली है। राजस्थान में भी ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के मरीज सामने आए हैं। एसएमएस में ही हर माह 10 से अधिक केस आ रहे हैं। जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर सहित अन्य मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में हर माह 20 से अधिक केस आ रहे हैं। इसमें चेहरे की एक नस अचानक ऐसा दर्द देती है जैसे बिजली का झटका हो। यह कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक बार-बार आता है। दुनियाभर में कई मरीजों ने इस दर्द से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। इसको सुसाइड डिजीज भी कहा जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह बीमारी अधिकांश उम्रदराज महिलाओं को होती थी, लेकिन इसकी चपेट में युवा भी आने लगे हैं। क्या हैं इस बीमारी के लक्षण? पेन मैनेजमेंट में इंटरवेंशनल तकनीक कारगर राजस्थान पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट बिना बड़ी सर्जरी के दर्द से कुछ हद तक राहत दे रहे हैं। रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन तकनीक को सही माना जाता है। प्रक्रिया में दर्द पैदा करने वाली नर्व को विशेष सुई के जरिए रेडियो तरंगों से जलाकर निष्क्रिय कर देते हैं। इससे मरीज को 6 माह से लेकर कई वर्षों तक राहत मिलती है। इंटरवेंशनल पेन स्पेशलिस्ट डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि इसके कई मरीज ऐसे आते हैं जो दिन में 20 बार रोते हैं। रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन से उन्हें तुरंत राहत मिलती है। सर्जरी कब ज़रूरी होती है? न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता बताते हैं कि जब दवा काम नहीं करतीं और जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है, तब माइक्रोवैस्कुलर डीकंप्रेशन सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसमें उस नस पर दबाव बना रही रक्तवाहिनी को हटाता है। यह ब्रेन सर्जरी होती है। क्या होती है यह बीमारी? एसएमएस के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश खंडेलवाल व न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एसपी पाटीदार ने बताया कि चेहरे में 3 मुख्य नसें होती हैं जो जबड़े, गाल, आंख, नाक और माथे तक फैली होती हैं। जब किसी एक पर ब्लड वेसल का दबाव, स्ट्रक्चरल बदलाव, या नर्व की परत (मायलिन शील्ड) का क्षरण हो जाता है तो ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया होता है। इसका दर्द मरीज को मानसिक रूप से तोड़ देता है। लोग खाना छोड़ देते हैं, बात नहीं करते, डिप्रेशन में चले जाते हैं। शुरुआती अवस्था में एंटी-कन्वल्सेंट दवाओं से दर्द को काबू किया जा सकता है।
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