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    नगर निगम की अच्छी पहल:330 आटो व वैन चालकों की आंखें जांचीं, दोष के बाद भी नहीं लगा रहे थे चश्मे

    1 year ago

    बीकानेर की सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो,वैन और मैजिक चलाने वाले 50 फीसदी से ज्यादा ड्राइवर किसी न किसी तरह की दृष्टि दोष की समस्या से जूझ रहे हैं। इस चौंकाने वाले तथ्य का पता तब चला जब नगर निगम ने एक प्राइवेट फर्म के साथ मिलकर करीब सवा तीन सौ ड्राइवरों की आंखों का चेकअप किया। इससे भी बड़ी चिंता की बात ये है कि इसमें आधे से तो वो हैं हमारे घरों से बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने का काम करते हैं। नगर निगम ने एक महीने पहले ही सामाजिक सरोकार के तहत अपने स्टाफ और स्कूली वाहनों के ड्राइवरों की आंखों का चेकअप कराया। देश की जानी-मानी चश्मा कंपनी की ओर से चिकित्सक आए थे। 330 लोगों का चेकअप हुआ। जब रिपोर्ट सामने आई तो हैरान करने वाली थी। 60 प्रतिशत से ज्यादा ड्राइवरों की आंखों में दृष्टि दोष सामने आया। चेकअप के दौरान 92 तो ड्राइवर ऐसे जिनकी आंखों में कमी निकली। निगम के करीब 56 के आसपास कार्मिक जिनको चश्मे की जरूरत महसूस हुई। इससे भी बड़ी हैरानी की बात ये कि जिन्होंने टेस्ट कराया उसमें से 70 प्रतिशत लोग चश्में का उपयोग ही नहीं कर रहे थे। जिन्हें जरूरत थी उन्हें चश्मे दिए गए। समाधान क्या - प्रत्येक स्कूल को अपने बस , टैक्सी, मैजिक समेत तो भी बच्चों को स्कूल से घर ले जाने के वाहन है उनके ड्राईवर की आंखों का चेकअप करना चाहिए ताकि वाहन चलाते वक्त उन्हें कोई दिक्कत ना हो क्योंकि उनके पास तमाम परिवारों के नौनिहालों की जिम्मेवारी होती है। प्रशासन को भी शहर में घूम रहे ऑटो, कार या टैक्सी चालकों की आंखों का चेकअप कराना चाहिए। कायदे से परिवहन विभाग को भी अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाते वक्त आंखों का चेकअप करके ही लाइसेंस देना चाहिए। आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट ने भी चौकाया था..... कुछ साल पहले आईआईटी दिल्ली और देश के जाने-माने एनजीओ ने मिलकर हाई-वे पर दौड़ रहे वाहनों के ड्राईवर्स का रेंडमली आंखों का चेकअप किया था। उसकी रिपोर्ट के तहत 55.1% ट्रक समेत अन्य ड्राइवरों की नजर कमजोर है। 53.3% को दूर की दृष्टि में सुधार की आवश्यकता है। 46.7% को निकट दृष्टिदोष की समस्या है। इस जांच में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के 50 हजार से ज्यादा ड्राइवरों को शामिल किया गया। ड्राईविंग करने वालों की अन्य फिटनेस पर भी सवाल उठे थे। कई ब्लडप्रेशर से पीड़ित हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रिपोर्ट लॉन्च करते हुए कहा था कि ड्राइवरों के प्रशिक्षण और कल्याण के लिए डिजिटलीकरण के साथ ऐप्स के एकीकरण पर काम किया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में दृष्टि दोष अहम कारण ड्राइवर ज्यादातर चश्मा नहीं लगाते। बहुत से तो चेक ही नहीं कराते। सरकारों ने सरकारी ड्राइवरों की आंखों का चेकअप नहीं कराया। रात में लाइट रिफलेक्शन पड़ते ही ड्राइवर तो चकाचौंध हो जाता है। ये सड़क दुर्घटना में अहम कारण है। हैरानी की बात है कि लाइसेंस बनाते वक्त हम ट्रैफिक लोगों की तो पहचान कराते हैं लेकिन जिन आंखों के दम पर लोग स्टेयरिंग संभालते हैं उसके चेकअप रिपोर्ट कभी मांगते। 40 साल के बाद तो कायदे से ये अनिवार्य ही कर देना चाहिए कि लाइसेंस रिन्यू तब होगा जब आंखों का टेस्ट की रिपोर्ट सामने हो। ये भी गंभीर बात है कि हर परिवार से बच्चों को ले जाने वाले ड्राइवरों की आंखों का चेकअप होना ही चाहिए। हर एक साल में आंखों की रिपोर्ट अनिवार्य कर दी जाए तो सड़क दुघर्टनाएं घटेंगी।
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