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    जेनेवा में गूंजे मोहनवीणा और सात्विकवीणा के ‘गोल्डन नोट्स’:पं. विश्वमोहन भट्ट और पं. सलिल भट्ट की जुगलबंदी ने शास्त्रीय संगीत से दिया विश्व शांति का संदेश

    1 year ago

    भारतीय शास्त्रीय संगीत ने एक बार फिर विश्व के प्रतिष्ठित मंच पर अपनी आत्मिक उपस्थिति दर्ज कराई, जब ग्रैमी अवार्ड विजेता पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट और सात्विक वीणा के आविष्कारक तंत्री सम्राट पं. सलिल भट्ट की जुगलबंदी ने संयुक्त राष्ट्र महासंघ (UNO) के जेनेवा मुख्यालय को सुरों की सात्विक ध्वनियों से सराबोर कर दिया। यह ऐतिहासिक प्रस्तुति वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) और भारत के 50 वर्षों के सहयोग की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित की गई, जिसे ‘गोल्डन नोट्स ऑफ मोहन वीणा – सात्विक वीणा’ नाम दिया गया। इस आयोजन में भारतीय दूतावास, जेनेवा और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) का विशेष सहयोग रहा। त्रिवेणी बनी भारतीय शास्त्रीय, लोक और तबला की संगत इस जुगलबंदी में तबला संगत की भूमिका में पं. हिमांशु महंत थे, जिनकी सटीक लयकारी और अनुभवी संगत ने समूचे कार्यक्रम को ऊर्जावान बनाया। वहीं राजस्थानी लोकसंगीत की खुशबू लेकर मंच पर आए कूटला खान मांगणियार, जिनकी लोकधुनों ने प्रस्तुति में मिट्टी की खुशबू और लोक आत्मा का रंग घोला। इस संगीत संध्या ने शास्त्रीय, लोक और विश्व संगीत का ऐसा त्रिवेणी संगम रचा, जिसने न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया, बल्कि यह सिद्ध किया कि भारतीय संगीत केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। 30 देशों के राजनयिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि बने साक्षी इस कार्यक्रम में विश्व के 30 देशों के राजनयिक, मंत्री, तकनीकी प्रतिनिधि और सांस्कृतिक हस्तियां उपस्थित रहे। सभी श्रोताओं ने मोहन वीणा और सात्विक वीणा के माध्यम से भारत की शाश्वत संगीत परंपरा और रचनात्मक विरासत को सजीव अनुभव किया। दर्शकों के अनुसार, यह संगीत सिर्फ सुना नहीं गया, बल्कि आत्मा से महसूस किया गया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, परंपरा और रचनात्मकता का वैश्विक उत्सव था। वीणा की तारों से निकले स्वर अब सिर्फ भारतीय सरहदों तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व चेतना में अनुनाद बनकर बस गए हैं।
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