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    विदेशों में भारतीय नागरिकों की मृत्यु पर पार्थिव देह शीघ्र स्वदेश लाने व आर्थिक सहायता की मांग

    11 months ago

     

    लोकसभा में नियम-377 के तहत यह मुद्दा उठाया गया कि रोजगार और पढ़ाई के सिलसिले में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की मृत्यु होने पर पार्थिव देह को स्वदेश लाने में अक्सर काफी विलंब हो जाता है। हाल ही में चूरू क्षेत्र के धर्मेन्द्र बुरड़क की जर्मनी में असामयिक मृत्यु के बाद पार्थिव देह लाने में 20 दिन लग गए, जिससे परिवार को मानसिक व आर्थिक दोनों तरह की पीड़ा झेलनी पड़ी। ऐसे मामलों में भारत सरकार को त्वरित सहायता तंत्र (Fast-Track Mechanism) बनाकर दूतावासों की जिम्मेदारी व संसाधन बढ़ाने तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता प्रदान करने की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।

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