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    SMS-हॉस्पिटल में ब्लड की बीमारियों के लिए अलग यूनिट शुरू:कैंसर-थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को मिलेगा फायदा; सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टरों की देखरेख में होगा इलाज

    9 months ago

    खून की अलग-अलग बीमारियों से परेशान मरीजों के लिए अच्छी खबर है। जयपुर के सवाई मेडिकल कॉलेज में एनीमिया, लिम्फोमा, थैलेसीमिया से पीड़ितों के लिए अब अलग से ​डेडिकेटेड क्लिनिकल हेमेटोलॉजी डिपार्टमेंट की शुरुआत हुई है। इस यूनिट के बनने से सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टरों की निगरानी में ब्लड कैंसर के मरीजों को डेडिकेटेड इलाज मिल सकेगा। इस डिपार्टमेंट के अंडर 20 बेड की एक यूनिट भी बनाई गई है। इसमें सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टर्स के जरिए केवल खून से जुड़ी तमाम बीमारियों का इलाज होगा। इस विंग के शुरू होने से अब उम्मीद जताई जा रही है कि ब्लड कैंसर के मरीजों बेहतर इलाज के लिए CAR-T थेरेपी की भी शुरुआत हो जाएगी। मरीज भर्ती करना शुरू किया डिपार्टमेंट के एचओडी और यूनिट के हेड डॉ. विष्णु शर्मा ने बताया- अभी तक खून की बीमारी से जुड़े मरीजों का इलाज जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट की यूनिट में होता था। अब नए डिपार्टमेंट (क्लिनिकल हेमेटोलॉजी) की शुरुआत की है। इसमें खून की बीमारी से जुड़े मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया है और इलाज दिया जा रहा है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ये पहला डिपार्टमेंट डॉक्टर ने बताया- एसएमएस मेडिकल कॉलेज राजस्थान का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज है। जहां इस डिपार्टमेंट और यूनिट की शुरुआत की गई है। ये एक सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं में गिना जाता है। अभी केवल जयपुर के एक निजी कॉलेज में ही इस विंग और यूनिट का संचालन हो रहा है। 20 बेड के साथ यूनिट शुरू इस डिपार्टमेंट की डेडिकेटेड यूनिट एसएमएस के आईडीएच सेंटर में बनाई है। इस यूनिट में फिलहाल 20 बेड हैं। आगे इसे और बढ़ाया जाएगा। डॉक्टर शर्मा ने बताया- इस डिपार्टमेंट की हर बुधवार को ओपीडी रहती है। हर सप्ताह यहां 30 से ज्यादा मरीज खून की बीमारी के संबंध में आ रहे हैं। ब्लड कैंसर के मरीजों को मिलेगा फायदा अभी ब्लड कैंसर के मरीजों का इलाज ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट और जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट में होता है। इस यूनिट के बनने से यहां सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टरों की निगरानी में ब्लड कैंसर के मरीजों को डेडिकेटेड इलाज मिल सकेगा। एसएमएस में अभी ब्लड संबंधित एडवांस जांच होती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि भविष्य में नई तकनीक और उपचार के दूसरे संसाधन लाकर मरीज के लिए सुविधाओं में विस्तार किया जा सकेगा। CAR-T सैल थेरेपी करने के लिए संसाधन मौजूद दैनिक भास्कर से की गई विशेष बातचीत में कैंसर मरीजों के बेहतर इलाज के पूछे गए एक सवाल पर डॉक्टर शर्मा ने बताया- अभी हम ब्लड कैंसर मरीजों को कीमो थेरेपी के अलावा बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा दे रहे हैं। लेकिन कैंसर मरीजों को लेटेस्ट उपचार के लिए CAR-T सैल थेरेपी देश के चुनिंदा हॉस्पिटलों में दी जा रही है। उन्होंने बताया- एसएमएस में जो मौजूदा संसाधन हैं, उनके जरिए हम भी इस थेरेपी की शुरुआत करके मरीजों को लाभ दे सकते हैं। इस थेरेपी में पैसा बहुत ज्यादा लगता है, इ​सलिए इसे अभी शुरू नहीं किया जा रहा। लेकिन हम कोशिश करेंगे कि कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वारी के जरिए एक प्रस्ताव सरकार को भिजवाएं। जिसमें इस थेरेपी को भी सरकारी की इंश्योरेंस स्कीम 'मां योजना' या दूसरी योजना में शामिल करवाकर मरीजों के लिए शुरू करवाई जाए।
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