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    गड्ढों के कारण हो रहे हादसे:बीकानेर से हनुमानगढ़ के बीच 179 किमी में 300 से ज्यादा गड्‌ढे, 2000 से ज्यादा पैचवर्क, सर्विस रोड पर भी गहरे गड्‌ढे

    8 months ago

    मैं इस वक्त खड़ा हूं नौरंगदेसर। यहां से मुझे अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से हनुमानगढ़ तक का सफर करना है। जैसे ही मैं नौरंगदेसर सर्विस रोड से हाईवे पर चढ़ना शुरू करता हूं तो इसी में दो इतने गहरे गड्ढे हैं कि अगर बचकर नहीं निकले तो कार तक पलट सकती है। ये गड्ढे तब हैं जब यहां पैचवर्क भी होना बताया गया। यहां गड्ढों का मुख्य कारण बारिश के पानी की सही निकासी नहीं होना है। हाईवे पर चढ़ने के बाद 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ी ही थी कि अचानक हाईवे के बीचोंबीच एक गड्ढा आया। गड्ढे से बचने के लिए कार को झटके से बाईं तरफ मोड़ा तो पूरी कार हिल गई। यूं लगा मानो कार पलट ही जाएगी। क्योंकि इस हाईवे पर पहली बार आया, इसलिए कुछ नहीं पता था कि कहां पर गड्ढा है। वैसे हाईवे पर स्पीड 100 किमी प्रति घंटा की है, लेकिन एक गड्ढे से टकराने के बाद हिम्मत नहीं हुई कि गाड़ी की स्पीड 80 से ऊपर करूं। कुछ किमी तक जब रोड ठीक दिखी तो गाड़ी 85 तक पहुंची, मगर 85 तक गाड़ी पहुंची ही थी कि फिर अचानक सड़क पर न सिर्फ गड्ढा आया बल्कि उस गड्ढे के बीच डामर इकट्ठा होकर एक खेत की मेड़ जैसा रूप ले चुका था। अगर इस पर कार का पहिया आ जाता तो इतना जोर का झटका लगता कि संभलना मुश्किल हो जाता। यहां जैसे-तैसे संभले तो सामने देखा कि इसी गड्ढे से संतुलन खोने के बाद एक ट्रक हाईवे के डिवाइडर में जा घुसा था। उसे निकालने की कोशिशें चल रही थीं। बीकानेर से अर्जुनसर तक कम से कम ऐसे ढाई सौ गड्ढे मिले। सिर्फ ये गड्ढे ही नहीं, हाईवे पूरा पैचवर्क से पटा हुआ था। एक किमी सड़क भी ऐसी नहीं थी जहां पैच न किया गया हो। पैच भी समतल न होने से बार-बार झटके लगते रहे। ट्रक चालकों ने हाईवे की साइड तोड़कर निकाला रास्ता, रोज हजारों का नुकसान हनुमानगढ़ पर कट न होने से ट्रक चालकों ने ऐसी तरकीब निकाली कि न सिर्फ वे हनुमानगढ़ उतर भी सकते हैं बल्कि टोल भी बचा लेंगे। दरअसल, अगर आपको लूणकरणसर से हनुमानगढ़ जाना है तो चढ़ते वक्त आपकी एंट्री होगी कि आप इस हाईवे पर चढ़ गए। टोल तब कटेगा जब आप हाईवे से उतरेंगे। वहां हिसाब होगा कि आप कितने किमी चलकर आए। मगर इस हाईवे पर ऐसा नहीं है। ट्रक चालकों ने हनुमानगढ़ से कुछ किमी दूर बाई साइड में एक कट कर दिया। मिट्टी से ढलान को पाट दिया। बीच खेतों से होते हुए हनुमानगढ़ में एंट्री कर जाते हैं। इससे टोल की बचत भी होती है और हनुमानगढ़ उतर भी जाते हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस कट की खबर एनएचएआई को नहीं है। भास्कर टीम ने जब गाड़ी यहां से उतारी तो पास में ही हाईवे अथॉरिटी की गाड़ी खड़ी थी, मगर किसी ने नहीं रोका। हादसे रात में ज्यादा दिन की रोशनी में गड्ढे दूर से चालक को दिख जाते हैं, मगर असली दिक्कत रात को होती है। अगर सामने से वाहन की लाइट का रिफ्लेक्शन पड़ा और बाईं साइड वाली स्पीड 80 किमी तक भी हुई, तो गड्ढों में पहिया आने के बाद हादसा होना तय है। रात को गड्ढे भी कम दिखाई देते हैं और सामने के वाहनों का रिफ्लेक्शन भी ज्यादा आता है। हनुमानगढ़ से बीकानेर आते वक्त सिर्फ 3 ही गड्ढे ऐसा नहीं कि हाईवे की दोनों ही ओर सड़कें ही क्षतिग्रस्त हैं। अगर आप हनुमानगढ़ से वापस बीकानेर आ रहे हैं तो गड्ढे कम हैं। फिर नौरंगदेसर और लूणकरणसर के बीच 3 गड्ढे मिलेंगे, मगर वे हैं बहुत खतरनाक, क्योंकि गड्ढों की चौड़ाई 4 वर्गफुट तक है। ऐसे में अगर स्पीड में गाड़ी आई तो राम से काम पड़ना तय है। "मैंने अभी हाल ही में जॉइन किया है। मेरे पास इसकी खबर है कि 20 किमी एरिया में कुछ गड्ढे हैं, मगर वो 240 हैं, इसकी जानकारी नहीं है। मैंने इसके दो नोटिस भी जारी कराए हैं। जल्दी ही ये शिकायत दूर की जाएगी। अभी लाइबिलिटी पीरियड में है सड़क। हालांकि दूसरी साइड में ठीक करा दिया है और जैसे ही बारिश खत्म होगी, उसके पास पूरा हाईवे नए सिरे से तैयार कराएंगे।" -पुष्पेन्द्र सिंह, पीडी, हनुमानगढ़, एनएचएआई हनुमानगढ़ जाना है तो पल्लू में उतरिए, फिर जाइए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से अगर आप हनुमानगढ़ जाने की सोच रहे हैं तो गलतफहमी में मत रहिए कि आपको हनुमानगढ़ में उतरने के लिए कोई आधिकारिक कट मिलेगा जहां से आप टोल कटवाकर हनुमानगढ़ जा सकते हैं। आपको अधिकृत रूप से तो पल्लू में उतरना होगा। क्योंकि हनुमानगढ़ में एक्सप्रेसवे का कोई कट नहीं है उतरने के लिए। हां, पास में देखेंगे तो अब हनुमानगढ़ उतरने के लिए संपर्क मार्ग तैयार जरूर हो रहा है। मगर वो कब तक बनेगा, कहा नहीं जा सकता।
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