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    बीकानेर में बनने वाले अंडरपास में मालिकों को मिलेगा मुआवजा:5 फीट की जगह के लिए गिरानी पड़ेगी बिल्डिंग, दुकानदार बोले-कितने रुपए मिलेंगे नहीं बताया

    10 months ago

    बीकानेर के कोटगेट और सांखला फाटक पर प्रस्तावित अंडरपास निर्माण से पहले ही विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। अंडरपास के रास्ते में आने वाली 36 बिल्डिंग को अधिग्रहित करने के लिए बीकानेर विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने नोटिस जारी कर दिए हैं। इन नोटिसों के बाद खासतौर पर किराए पर दुकानें चलाने वाले व्यापारी बेहद परेशान हैं, क्योंकि मुआवजा केवल भवन मालिक को मिलेगा, न कि दशकों से यहां व्यापार कर रहे दुकानदारों को। वहीं अंडरपास बनाने वाली एजेंसी को न सिर्फ सीवरेज नाले की समस्या से जूझना पड़ेगा, बल्कि चार मंजिला इमारतों में से कुछ हिस्से को खाली कराना भी चुनौतीपूर्ण होगा। अवाप्ति के लिए अधिकांश बिल्डिंग पूरी तरह अवाप्त करने के बजाय उसके छोटे-छोटे हिस्से लिए जा रहे हैं। इसी तरह सांखला फाटक के पास भी एक बड़ी बिल्डिंग का एक तरफ का हिस्सा ही अवाप्त हो रहा है। ऐसे में इस पूरी बिल्डिंग को ही ध्वस्त करना पड़ेगा। कोटगेट अंडरपास: अंडरपास के लिए यहां सबसे बड़ी समस्या कोटगेट अंडरपास की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह मुख्य सड़क से न होकर फड़ बाजार की संकरी गली से होते हुए मुख्य दुकानों के पीछे से निकलेगा। इससे कई दुकानों के पिछले हिस्से टूटेंगे, जिससे पूरी बिल्डिंग का उपयोग असंभव हो जाएगा। जैसे- पेंटर भोज की दो दुकानों में से एक के पीछे का हिस्सा अधिग्रहित हो रहा है। दुकानदार जितेंद्र गहलोत का कहना है कि अगर प्रशासन केवल 5 फीट भी लेता है, तो बाकी बिल्डिंग गिराए बिना उसका उपयोग नहीं हो पाएगा। मुआवजा सिर्फ जमीन का नहीं, पूरी बिल्डिंग का चाहिए। इसी तरह फड़ बाजार में चिरंजीलाल श्रीमाली की बिल्डिंग का भी एक हिस्सा ही लिया जा रहा है, लेकिन इससे पूरी इमारत की संरचना पर असर पड़ेगा। पास में बनी वाइन शॉप और अन्य हिस्सों को भी ध्वस्त करना पड़ेगा। सांखला फाटक अंडरपास: सीवरेज लाइन बनी चुनौती इस अंडरपास के लिए कोयला गली से मटका गली तक रास्ता निकाला जा रहा है। मटका गली में करीब 15 फीट गहरी सीवरेज लाइन है, जिसके किनारे का हिस्सा अधिग्रहित किया जा रहा है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि सीवरेज लाइन के इतने करीब अंडरपास कैसे सफल हो पाएगा। यह अंडरपास बीकानेर भुजिया भंडार के सामने खुलेगा, लेकिन वहां भी हाल ही में नया सीवर चैंबर बना है। ऐसे में निर्माण एजेंसी के लिए यह एक बड़ी तकनीकी चुनौती बन सकती है। यहां उर्मिला आसोपा की कुछ बिल्डिंग को आंशिक रूप से अवाप्त किया जा रहा है। इसके बाद बचने वाला हिस्सा इतना छोटा होगा कि उसका उपयोग ही नहीं होगा। आंशिक अधिग्रहण से पूरे भवन को खतरा इस बार अधिग्रहण की प्रक्रिया में पूरी बिल्डिंग लेने की बजाय केवल आंशिक हिस्सों को लिया जा रहा है। उदाहरण के लिए भोज प्रिंटिंग वर्क्स के पीछे का हिस्सा अधिग्रहित हो रहा है, लेकिन शेष हिस्सा उसी से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में पूरी इमारत को ही गिराना पड़ सकता है। सांखला फाटक के पास भी एक बड़ी बिल्डिंग का सिर्फ एक हिस्सा लिया जा रहा है, जिससे पूरी इमारत कमजोर हो सकती है। दुकानदारों का सवाल: हमें क्या मिलेगा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यहां वर्षों से दुकान चला रहे किरायेदारों का क्या होगा? मुआवजा तो मकान मालिक को मिलेगा, लेकिन इन दुकानदारों को कोई राहत नहीं दिख रही। काली माई होटल सहित आसपास की कई दुकानों को तोड़ने की तैयारी है। डिस्पोजल की दुकानों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों की मांग है कि उन्हें आसपास के क्षेत्र में नई दुकानें दी जाएं ताकि उनका रोजगार न छिने।
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